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د ښځو د حقونو فعالان: پر ښځو د طالبانو محدودیتونه د جبري ودونو او ښځو سره د تاوتریخوالي د زیاتیدو سبب شوي

په داسې حال کې چې د طالبانو د امر بالمعروف او نهی عن المنکر وزارت تازه د لسګونو ښځو د جبري نکاح او دغه راز د ښځو په وړاندې د کورنۍ تاوتریخوالي د لسګونو قضیو د مخنیوي ادعا کړې ده، د ښځو د حقونو یو شمېر فعالان وايي که طالبان رښتیا هم د ښځو د حقونو د ورکړې دعوه کوي، نو د دوی په وړاندې دې د کار او زده کړو دروازې پرانیزي.

دوی دغه راز وايي، طالبانو په تېرو څه د پاسه دریو کلونو کې وښودله چې د ښځو د حقونو د ورکړې په برخه کې هېڅ ډول بدلون نه مني او دا چې ورځ تر بلې پر ښځو محدودیتونه زیاتوي.

د ښځو د حقونو فعاله او د ښځو د شبکې مشره ترنم سیدي ازادي راډیو ته وویل:

"که طالبان رښتیا هم د ښځو د حقونو ورکړې ته ژمن وي، اول دې دوی ته د کار او زده کړو اجازه ورکړي، په سیاسي مشارکت کې دې برخه ورکړي، دوی ته دې د ازادانه ګرځېدو اجازه ورکړل شي. تر کومه چې طالبان ښځو ته دغه بنسټیز او انساني حقونه نه ورکوي، د دوی هر ډول دروغ او ادعاوې د منلو نه دي."

د طالبانو د امر بالمعروف او نهی عن المنکر وزارت ویاند سیف الاسلام خېبر د جمعې په ورځ، د مې ۲۳مه، د طالبانو تر واک لاندې ملي ټلویزیون ته ویلي چې په تېره میاشت کې ۲۴ مېرمنو ته د میراث او ۲۲ مېرمنو ته یې د مهر حق اخیستی دی.

هغه د دغه پېښو د مخنیوي څرنګوالي په اړه څه نه دي ویلي.

نوموړي ویلي، دغه راز یې ۴۰ مېرمنې له کورني تاوتریخوالي ژغورلې او د ۳۸ جبري نکاحونو مخه یې نیولې ده، خو د ښځو د حقونو فعالانې ادعا کوي چې د طالبانو ډېر شمېر غړي پخپله په کورني تاوتریخوالي او دغه راز د جبري نکاحونو په مواردو کې لاس لري.

د ښځو د حقونو فعاله راحله تلاش ازادي راډیو ته وویل:

"په داسې حال کې چې تقریباً د طالبانو هر غړی دوهم او درېیم ودونه کړي دي، او هغه هم له کم عمره نجونو سره — چې دا خپله د جبري نکاح ډولونه دي — که دوی رښتیا هم د ښځو د حقونو ورکړې ته ژمن وي، او دعوه کوي چې د ښځو حقونه یې تأمین کړي دي، نو په تېرو دریو کلونو کې چې پر ښځو کوم ظلمونه شوي، دا څه دي؟ نو ویلای شم چې د امر بالمعروف وزارت وروستۍ څرګندونې دروغ دي او د خلکو او نړیوالو د تېرایستلو لپاره دي."

په داسې حال کې چې واک ته تر رسېدو وروسته، د طالبانو مشر ملا هبت‌الله په یوه فرمان کې له خپلو غړو غوښتي وو چې له دوهم او درېیم ودونو ځان وساتي، خو د راپورونو پر بنسټ، د طالبانو له مشر نیولې بیا تر ډېرو چارواکو، دوهم او درېیم ودونه کړي دي.

ویل کېږي دا ودونه تر ډېره د ډېرو پیسو په بدل کې ترسره شوي دي.

په وروستۍ پېښه کې، نږدې یوه میاشت مخکې، د تېرې اپرېل میاشتې په ۲۸مه نېټه، په غور ولایت کې، د عابده په نوم یوې شل کلنې نجلۍ د طالبانو له یوه غړي سره د جبري واده نه د خلاصون لپاره ځان ته اور ورته کړی وو.

د نوموړې د کورنۍ یو شمېر غړو ادعا کړې وه چې دا پېښه د دغه ولایت په تیوره ولسوالۍ کې هغه مهال رامنځته شوه، چې د طالبانو یوې ډلې د هغې کور ته هجوم وروړ او هڅه یې کوله چې عابده په زوره له ځان سره یوسي.

د طالبانو د حکومت ویاند ذبیح‌الله مجاهد هغه مهال د دې ادعا په اړه د ازادي راډیو پوښتنو ته ځواب نه وو ویلی، خو د طالبانو د امر بالمعروف او نهی عن المنکر وزارت داسې مهال د ښځو د حقونو د ورکړې ادعا کوي، چې د دغې ډلې تر واکمنېدو وروسته، په افغانستان کې له منځنیو زده کړو د محرومو شویو نجونو شمېر ۲.۲ میلیونو ته رسېږي، دغه راز دوی لکونه مېرمنې له کاره منع کړي، او افغان ښځې له کورونو د وتلو، کار کولو او ټولنیزو حقونو څخه بې‌برخې شوي دي.

د ښځو د حقونو بېلابېلو بنسټونو طالبان د ښځو پر وړاندې د تبعیضي او ظالمانه سیاستونو په ترسره کولو تورن کړي دي.

په افغانستان کې د ملګرو ملتونو سیاسي استازولۍ (یوناما) د ۲۰۲۴ کال د نومبر په ۲۵مه نېټه، د ښځو پر وړاندې د تاوتریخوالي د له منځه وړلو د نړیوالې ورځې په مناسبت، په یوه اعلامیه کې ویلي وو چې افغانستان لا هم د ښځو پر وړاندې د تاوتریخوالي له خورا لوړې کچې سره مخ دی، او دا چې د ژوند په ټولو برخو کې د ښځو پر وړاندې روان تبعیض، دا تاوتریخوالی لا پسې زیات کړی دی.

څو ورځې مخکې، د افغانستان لپاره د بریتانیا استازولۍ ویلي وو چې په دې هېواد کې واده شوې ښځې له فزیکي، جنسي او عاطفي ځورونو سره مخ دي.

دغه استازولۍ په خپله ایکس/ پخواني ټویټر پاڼه کې، د روغتیا نړیوال سازمان (ډبلیو اېچ او) له قوله ویلي چې اوس مهال په افغانستان کې ۴۶ سلنه واده شوې مېرمنې فزیکي تاوتریخوالی تجربه کوي.

د ښځو د حقونو فعالانې وايي، چې پر افغانستان د طالبانو تر بیا واکمنېدو وروسته، په دې هېواد کې د ښځو د غږ اورېدو ټول بنسټونه له منځه وړل شوي، چې له امله یې د ښځو پر وړاندې تاوتریخوالی زیات شوی دی.

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