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د یوه طالب کیسه چې وایي فکر یې کاوه د جمهوري نظام کارکوونکي کافران دي

د ننګرهار ولایت یو ۳۹ کلن اوسېدونکی چې اوس په ختیځه حوزه کې د طالبانو د حکومت د استخباراتو له مسولینو دی، وايي، د جمهوري نظام د کارکوونکو د وژلو لپاره ځانمرګي برید ته چمتو و.

ده د موضوع د حساسیت له امله نه غوښتل په راپور کې یې نوم خپور شي او د غږ بدلولو په شرط یې له ازادي راډیو سره په خبرو کې د طالبانو له لیکو سره د یو ځای کېدو په اړه وویل:

"کله چې امریکایانو پر افغانستان یرغل وکړ، ما ته دا احساس وشو چې د طالبانو له اسلامي تحریک سره یو ځای شم، ۱۳۸۳ کال مې عمر د ۱۸ کلونو و خو ږیره مې لا نه وه."

دی زیاتوي چې له طالبانو سره یې د ځانمرګي بریدګرۍ روزنه تر لاسه کړه او نه یوازي یې د افغان ملي امنیتي او دفاعي ځواکونو پر ضد مخامخ جګړه کړې، بلکې د داعش پر ضد هم جنګېدلی دی. خو ده دا ونه ویل چې دا روزنه یې د چا له خوا او په کوم ځای کې تر لاسه کړې ده.

دی ادعا کوي چې په تېرو جګړو کې یې د کورنۍ ۱۱ غړي او خپلوان د تېر جمهوري نظام د پوځیانو په بېلابېلو هوایي بمباریو کې وژل شوي او له همدې کبله یې د غچ اخیستلو په پار د هغوی پر ضد لسګونو بریدونه کړي دي.

طالبانو نه یوازي د افغان ملي امنیتي او دفاعي ځواکونو پر ضد جګړه کړې ده بلکې پخوا یې د ډیری هغو خونړیو بریدو مسوولیت هم پر غاړه اخیستی دی چې د ښځو او کوچنیانو په ګډون سلګونو ملکي وګړي پکې وژل شوي.

خو دغه طالب اوس وايي، وروسته له هغه چې طالبان یو ځل بیا په افغانستان کې واک ته ورسېدل، ده هم ژوند ته مخه کړه او درس یې ووایه.

"ژوند مې ښه شو، زده کړې مې نیمګرې وې، دې ۴ کلونو کې مې ماسټري وکړه، اوس چاپې نشته، مهاجرت نشته، خپل وطن کې په ازاده فضا کې ژوند کوو.”

دې طالب همداراز ازادي راډیو ته وویل چې اوس ګرځېدلی دی او په تېرو څلورو کلونو کې یې د پلازمېنې کابل په ګډون داسې ولایتونو او ښارونو ته سفرونه کړي چې په تېر شلو کلونو کې یې هېڅ کله نه وه لیدلی.

دی ټینګار کوي چې که څه هم د ټولو عامو وګړو په اړه یې منفي نظر نه درلود خو په خبره یې د پوځیانو په ګډون د بېلابېلو حکومتي او غیر حکومتي ادارو کارکوونکي چې ځینو یې له بهرنیانو سره کار کاوه، ورته «دښمنان او حتی کافران» ښکارېدل، خو اوس له خلکو سره تر راشه درشه وروسته په هغه نظر نه دی:

"کوم کسان چې له اشغالګرو سره ګرځېدل، د هغوی ملاتړ یې کاوه یقیناً موږ ته کافر ښکارېدل، هغوی سره مو مقابله کوله يا مو ان ځانونه پرې ختمول، خو اوس داسې نه ده، که څه هم د ښار خلکو جمهوریت سره کار کاوه، خو اوس مو تګ راتګ دی، مړی ژوند او ناسته ولاړه سره لرو، مخکې مو دښمنان وو، خو اوس مو خپل افغانان خپل وروڼه دي."

که څه هم دغه طالب له هغو خلکو سره د ناستې ولاړې خبره کوي چې د تېر جمهوري نظام برخه ول، د ملګرو ملتونو، بشري حقونو سازمانونو او ګڼو نورو ادارو په دوامداره توګه راپورونه خپاره کړي چې طالبانو پخواني پوځیان، سیاستوال، خبریالان او د بیلابیلو کورنیو او نړیوالو ادارو کارکوونکي وژلي، ترې تم کړي او یا یې زنداني کړي دي خو طالبانو دا راپورونه رد کړي او له خلکو سره د راشه درشې خبره کوي.

په افغانستان کې د ملګرو ملتونو مرستندویه ملموریت (یوناما) یوه اونۍ وړاندې په خپل نوي راپور کې وویل چې طالبانو په تېرو ۴ میاشتو ۷ پخواني سرتېري شکنجه او وژلي دي.

د بشري حقونو څار نړیوال سازمان د ۲۰۲۱م کال د راپور له مخې طالبانو د خپل حکومت رامنځته کېدو په یوازې لومړۍ یوه نیمه میاشت کې په غزني، هلمند، کندهار او کندوز ولایتونو کې تر سلو زیات کسان ووژل او په دوی کې داسي خلک شامل و چې طالبانو ته تسلیم شوي یا طالبانو نیولي ول.

دغه راپور زیاته کړې وه چې د طالبانو مشرتابه د افغانستان د ملي امنیتي ځواکونو تسلیم شویو واحدونو غړو ته لارښوونه کړې وه چې نوم لیکنه وکړي چې د خوندیتوب تضمین لیک ترلاسه کړي. خو د طالبانو ځواکونو له دغې نوم لیکنې په استفاده هغوی نیولي او په ډېره چټکۍ یې یا اعدام کړي او یا یې په زوره ورک کړي دي او د دوی مړي یې خپلوانو یا ګاونډیانو ته پرې ایښي چې وې مومي.

دا طالب چې وايي اوس یې د تېر پر تله نظر بدل شوی دی، هیله څرګندوي چې افغان ښځو او نجونو ته د کار او زده کړو محدودیتونه ژر تر ژره لرې او په خبره یې «د اسلامي شریعت او افغاني کلتور» په فضا کې ورته د پرمختګونو زمینه برابره شي:

“د ښځو د تعلیم مخالف نه موږ یو او نه مو نظام، خو په مخلوط (نارینه وو) سره ګډ ډول نه، که چېرې دوی ته جلا ډول په پرده (حجاب) کې زمینه برابر شي نه د زده کړو مخالف یې نه یو، یقیناً چې کله یوه خور، مور، لور یا ښځه تعلیم ولري، ټولنه پرمختګ کولای شي.”

خو طالبانو په تېرو ۴ کلونو له بیا واکمنېدو وروسته، میلیونونه نجونې په ښوونځیو کې له شپږم ټولګیو نیولې تر پوهنتونونو او ان طبي انسټیټوټونو کې له زده کړو راوګرځولې، ان د کورسونو دروازې یې پر مخ ورتړلې او په ډیری نا دولتي او اکثرو دولتي ادارو کې یې د زرګونو ښځو پر کار بندیزونه لګولي دي.

که څه د دې طالب په شان پر افغانستان د ۲۰۲۱ کال د اګست پر ۱۵ د طالبانو له بیا واکمنېدو وروسته، د زرګونو طالب جنګالیو ژوند په لوړه کچه بدل شو، له مورچلو او پټنځایونو دفترونو ته ورسېدل او اوس په زغروالو یا مډرنو موټرونو کې ګرځي، خو برعکس په خپلو محدودیتونو او ځینو تکلارو سره یې میلیونونه افغانان کډوالۍ ته اړ کړل چې په کور دننه هم له شدیدي بې وزلۍ سره مخامخ دي او د دغه هیواد ډیری بنستونه په ځانګړي ډول تعلیمي او روغتیايي سکتورونه اغېزمن شوي دي.

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