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د شفافیت د څار بنسټ: طالبان دې د ځمکو د غصب ستونزه بنسټیزه هواره کړي

په تېرو نېږدې درې لسیزو کې د وسله والو او زورواکو له خوا د ځمکې غضب د افغان حکومتونو پر وړاندې یوه لویه ننګونه وه.


اوس د افغانستان د شفافیت د څار بنسټ د طالبانو له واکمن حکومته غواړي چې د ځمکو د غصب او د شخړو د حل لپاره یې بنسټیز ګامونه پورته کړي.


د دغه بنست مشر سید اکرام افضلي ازادي راډیو ته وویل، دا کار د عدلي او قضايي ارګانونو په پیاوړي کولو او په ټوله کې د قانون حاکمیت په غښتلی کولو سره شونی دی.


افضلي وويل: "تېر حکومت د پراخ فساد او د مافیایي کړیو د ځواک له امله د دغې ستونزې په مخنیوی کې پاتې راغلی وو. اوسني نظام ته په کار ده چې د ځمکو د غصب او د شخړو د حل لپاره بنسټیز ګامونه پورته کړي چې تر ټولو مهم د عدلي او قضایي بنسټونو پیاوړتیا اوپه ټوله کې د قانون حاکمیت غښتلی کول دي څو عدالت تامین شي او حق حقدار ته ورسیږي."




د افغانستان د ځمکو ادارې د ۱۳۹۵ کال د کب په ۲۵ یعنې نېږدې پنځه کاله مخکې ویلي و چې د افغانستان په ۳۰ ولایتونو کې یو میلیون او درې لکه جریبه ځمکه د حکومتي چارواکو په ګډون له ۱۵ زره زیاتو کسانو له خوا غصب شوې ده.


ازادي راډیو هڅه وکړه چې په دې اړه د ځمکو له ادارې تازه ارقام ولري، خو مسوولینو یې په دې اړه اړیکه ځواب نه کړه.


خو د مخکیني حکومت د سیمه ییزو اراګانونو په خپلواکه اداره کې یوې با خبره سرچینې چې د موضوع د حساسیت له کبله یې و نه غوښتل نوم یې واخیستل شي ازادي راډیو ته وویل، د مجاهدینو د لومړي پړاو واکمنۍ له پیل راهیسې بیا د جمهوریت تر سقوطه پورې له کابل ښار پرته په دغه هېواد کې دوه میلیونه او ۹ لکه جریبه دولتي، ملکي او وقفي ځمکه غصب شوې ده.


سرچینه وايي، له دې ځمکې له درې لکه جریبه زیاته بېرته راګرځول شوې ده.


سرچینه دا هم زیاتوي چې د غاصبینو شمېر له ۴۰ زرو زیات دی چې له عامو خلکو نیولی بیا تر قوماندانانو او ان رهبرانو تر کچې کسان په کې دي، خو سرچینې ازادي راډیو سره د اسنادو له شریکولو ډډه وکړه.


سرچینه وايي، د سیمه ییزو ارګانونو خپلواکې ادارې ته په دې اړه د څېړنو امر د ګوښه شوي جمهور رئیس محمد اشرف غني له خوا شوې و.


د افغانستان د شفافیت د څار بنسټ د ځمکو غصب او د ځمکو پر سر شخړې افغانستان کې یوه جدي ستونزه ګني چې د دوی به باور‌‌‌‌‌‌ ډېرې نورې ستونزې زیږوي، لکه د کورکلي او قومونو په کچه شخړې چې کله-کله خونړۍ پایلې هم لرلي، کلونه دوام کوي او د کورنیو د بې وزلۍ او دغه شان د نسلونو د دښمنیو لامل ګرځي.


د دغه بنسټ مشر دغه شان وايي، دا موضوع د زورواکو د پیاوړتیا او د مافیایي کړیو د رامنځ ته کېدو لامل هم ګرځي.


د افغانستان د بېلابېلو ولایتونو لغمان، کندهار او غزني څو تنو اوسېدونکي چې په تېرو نېږدې درې لسیزو کې یې ځکمې غصب شوي په خپلو خبرو کې همدا تصویر وړاندې کوي.


له ډلې یې ډاکټر جان محمد اسماعیل یې په اړه وايي: "ستراتېژیک ځای و، مهم ځای ځای و یو شخص ځمکه راڅخه یوړه د غصب په زور باندې."


همدا راز معلم اسماعیل بیا وايي: "دوسیه یې برابره کړه، قاضي ته یې تقریباً دوه لکه او شپېته زره کلدارې ورکړې، جعلي وثیقه یې جوړه کړه، په وثیقه کې داسې ولیکل شول چې ما څلور جریبه ځمکه ښځې ته په مهر کې ورکړې ده."


په افغانستان کې د زورواکو له خوا د ځمکې د غضب د مخنیوي موضوع هغه ستونزه ده چې د مخکینیو حکومتونو د ډېرو جدي ژمنو او اقدماتو سره-سره هم حل نه شوه.


خو د طالبانو حکومت وايي، د زورواکو او وسله والو له خوا به غصب شوې ځمکې بېرته دولت او خپلو اصلي خاوندانو ته یې ور وګرځوي.


د طالبانو د حکومت ویاند ذبیح الله مجاهد ازادي راډیو ته وویل، د وزیرانو شورا د پرېکړې پر بنسټ، ټول ادارو ته سپارښتنه شوې چې د غصب شوېو ځمکو په اړه څېړنې وکړي.


مجاهد وایي:"د غصب پر وړاندې اسلامي امارات ډېر جدي دی، له کومه وخته چې اسلامي امارات راغلی، یوه لوېشت ځمکه هم چا نه ده غصب کړې او نه یې غصبولی شي پر وړاندې یې درېږو. هغه ځمکې چې په تېر کې غصب شوي، دوه ډوله دي، یو دولتي ځمکې چې راتلونکي کې یې چې محاکم او څارنوالې جوړېږي د هغې تصفیه به وشي، بل که د ملکي خلکو ځمکې غصب شوي وي، د هغو هم باید محاکم شروع شي او د عریضې په صورت کې یې پوښتنه وشي."




د ښاغلي مجاهد په خبره، په دې اړه ټول اسناد له دوی سره موجود دي.


خو ښاغلي مجاهد دا خبرې داسې مهال کوي چې د طالبانو د حکومت د عدلیې وزارت شااوخوا لس ورځې مخکې په یوې خبري غونډه کې وویل چې په افغانستان کې د غصب شویو ځمکو په اړه هېڅ معلومات نه لري.


دغه شان د طالبانو حکومت د ځمکو د غصب په اړه د جدیتوب خبره داسې مهال کوي چې همدا تېره میاشت په کابل کې مېشتو هندوانو او سېکهانو رسنیو ته په یو استولي لیک کې ادعا کړې وه چې د کابل په احمد شاه بابا مېنه کې د دوی لس جریبه ځمکه چې مخکې غصب شوې، په پام کې ده جومات پرې جوړ شي.


افغان هندوانو او سېکهانو په مخکیني نظام کې هم د دوی د ځمکو د غصب په اړه ورته ادعاوې مطرح کړي دي.

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