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د خبریالانو یو شمېر نړیوال بنسټونه: طالبانو د افغانستان رسنۍ یرغمل کړي،خبریالان فزیکي ګواښونو سره مخ دي

د خبریالانو نړیوال فدراسیون ( ای ایف جي) وايي، په افغانستان کې د خبریالانو د نیولو څپه د رسنیو لږ پاتې ازادي هم تر پښو لاندې کوي.


( ای ایف جي) پرون د اګست په يولسمه په خپله ویب پاڼه کې په دې تړاو په یوې خپرې شوې اعلامیه کې، په افغانستان کې د خبریالانو د ناڅاپي نیونو په اړه چې په کندوز، ننګرهار او پکتیا کې تر سره شوي؛ ژوره اندېښنه څرګنده کړې.


دا په داسې حال کې ده چې د خبریالانو د یو شمېر ملاتړو بنسټونو په حواله، په پکتیا کې د اریانا ټلویزیون خبریال حبیب الله سراب، په ننګرهار کې د کلید راډیو د دفتر مسول فقیر محمد فقیرزی، د دغه رسنۍ خبریال جان اغا صالح او په کندوز کې د سلام وطندار راډیو سیمه ییز خبریال حسیب حساس هغه کسان دي چې له تېرې پنجشنبې راهیسې د طالبانو له خوا نیول شوي دي.

دغه شان په غزني کې د طالبانو تر کنټرول لاندې د باختر دولتي اژانس خبریال سید وحدت الله ابدالي هم د تېرې اونۍ له پیل راهیسې د طالبانو په بند کې دی.


د افغانستان د خبریالانو مرکز د طالبانو د سرچینو په حواله ویلي، چې ښاغلی ابدالي د خبریالې اړوند کومې قضیې په تور نه دی نیول شوی خو د طالبانو حکومت د څلورو نورو خبریالانو د تورونو په اړه څه نه دي ویلي.




د خبریالانو د نړیوال فدراسیون په اعلامیه کېد دغه سازمان د عمومي منشي مرستیال ټیم ډاوسن په حواله راغلي: "په تیرو دووکلونو کې په افغانستان کې خپلواکې رسنۍ په سیستماتیکه توګه کمزورې شوي، او یرغمل شوي، حال دا چې د طالبانو له راتګ دمخه رسنی په داسې شکل نه وي، د خبریالانو دا ډول نیول ټول خبریالان ډاروي، او دا د دې ښکارندوی کوي چې په افغانستان کې د خپلواکو رسنیو څومره ازادي پاتي ده."


د خبریالانو نړیوال فدراسیون د څلور خبریالانو سمدستي خوشي کیدو او په افغانستان کې د رسنیو تضمین لپاره د مثبت ګامونو د پورته کیدو غوښتنه کړې ده.


په ورته وخت کې د وسله والو جګړې د موقیعت او پیښو د معلوماتو پروژه یا (اې سي ایل اي ډي) په خپل راپور" دوه کاله ځپل: په افغانستان کې د ملکي وګړو په نښه کولو لپاره د طالبانو د تاوتریخوالي ترسیمولو" کې ویلي دي، د رسنیو سازمانونه باید د طالبانو له خوا د سانسورولو او دخپلسرو نیولو په وړاندې له طالبانو سره مبارزه وکړي، په افغانستان کې د طالبانو له واکمنۍ وروسته د رسنیو چاپیریال په ډرامتیک ډول بدل شوی او ۵۰ ٪ رسنۍ تړل شوي.


په را پور کې دا هم راغلي، چې د طالبانو په واکمنۍ کې خبریالان له ګڼو فزیکي ګواښونو سره مخ شوي دي.




( ای سي ایل اي ډي) د کابل له سقوط څخه د ۲۰۲۳ کال د جون تر میاشتې پورې د خبریالانو او د رسنیو د کار کوونکو په وړاندې له اویا څخه ډیرې پیښې ثبتې کړي دي چې په خبره یې له ۸۳ ٪ څخه زیاتې پیښې د طالبانو په وسیله تر سره شوي.


په ورته وخت کې په افغانستان کې اوسیدونکې یو شمېر خبریالان هم د طالبانو تر واکمنۍ لاندې د ژورنالیزم له ستونزمنو شرایطو شکایت کوي.


په کابل کې د یوې رسنۍ کارکوونکې، چې د امنیتي ستونزو له یې امله ونه غوښتل په راپور کې یې نوم واخیستل شي، ازادي راډيو ته وویل له تیرو دو کالو راهیسې د خبریالانو ستونزې نه یوازې دا چې کمې شوې نه دي، بلکې لا ډیرې شوې دي.


نوموړې وایي:" زه چې کله دفتر ته ځم، یا هم د کار په جریان کې تل ډار او اندیښنه راسره وي، چې کومه پیښه ونشي، نه یوازې زه بلکې کورنۍ مې هم راته اندیښمنه وي، زما کورنۍ ما دفتر ته رسوي او بیرته مې له دفتر کور ته بیايي، له تیرو دوو کلونو راهیسې نه یوازې دا چې د رسنیو په وړاندې دا ستونزه کمې شوي نه ده؛ بلکې ورځ تر بله ډیرې شوې دي، زه خپله تصمیم لرم، هیواد پریږدم ځکه د یو فرد په توګه کله چې څوک چیرې مصون نه وي نو کار کول هم هلته هیڅ مانا نلري." 




په کندهار کې اوسیدونکی یو خبریال هم چې نه غواړي د امنیتي ستونزو له امله یې نوم په راپور کې واخیستل شي، ازادي راډيو ته وویل: " د طالبانو تر واکمنۍ لاندې د ژورنالیزم کار ډیر ستونزمن شوی، موږ چې کله په یوه راپور کار کوه، د استخباراتو تر ادارې پورې راپسې راغلي، او ساعتونه بندي شوي یو، کارونه بې حد او واندازه سخت شوي دي ځکه څه چې اړتیا وي که په هغه اساس موږ مخته ولاړ شو نو د طالبانو استخبارتي ادارې مو ګواښي او څه چې دوی ژمنه کړې چې خبریالانو ته به د اطلاعاتو فرهنګ له لارې رسیدنه کیږي له بده مرغه هغسې نده، استخبارات په هر څه کې ډیر دخالت کوي." 


د طالبانو حکومت له ویاندویانو ذبیح الله مجاهد او بلال کریمی مو د خبریالانو د نړیوال فدراسیون د غوښتنې او د خبریالانو د ادعاوو او شکایتونو په اړه وپوښتل، خو دوی د راپور تر خپرېدو د ازادي راډیو پوښتنې ځواب نه کړې.




 د بې پولي خبریالان نړیوال سازمان هم پرون په خپل راپور کې ویلي، د ۲۰۲۱ کال له اګست مياشتې وروسته د ۱۲۰۰۰ خبريالانو له ډلې دوه پر درې برخې يې د خپلو دندو پرېښودو ته اړ شوي چې په سلو کې ۸۰ يې ښځينه خبريالانې دي.


په افغانستان کې د طالبانو له بیا ځلې واکمنیدو وروسته د نورو محدودیتونو ترڅنګ د خبریالانو وهل ټکول، سپکاوی، او نیول هغه څه دي چې خبریالان ورسره مخ دي.


په ورته وخت کې د امریکا د سولې انستیټیوت هم په خپل تازه راپور کې ویلي، چې طالبانو په افغانستان تر بیاځلې واکمنیدو وروسته، د بیان د ازادۍ د کنټرول په موخه ېې رسنیو باندې نظارتي او تنبیهي محدودیتونه لګولي دي.

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