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د بخښنې نړیوال سازمان: د طالبانو له واکمنۍ را وروسته افغانستان د بربادۍ په څنډه ولاړ دی

د بخښنې نړیوال سازمان وايي، د طالبانو له واکمنۍ را وروسته افغانستان د بربادۍ په څنډه ولاړ دی.


د بخښنې نړیوال سازمان د بشري حقونو، د نجونو او ښځو زده‌کړو، بیان ازادۍ او ملکي مرګ‌‌ژوبلې په اړه د طالبانو یو شمېر ځپونکو اقداماتو ته کتنه کړې.


دې سازمان په خپله ایکس شبکه یا پخواني ټویټر په یو بیان کې راغلي چې د طالبانو له واکمنۍ را وروسته افغانستان د بربادۍ په څنډه ولاړ دی.


په بیان کې یو شمېر ارقام خپاره شوي او لیکي، واک ته د طالبانو له رسېدو وروسته، یعنې د ۲۰۲۱ کال له اګست څخه د ۲۰۲۲ کال تر جون پورې طالبانو ۱۲۴۷ کسان نیولي چې ۱۸۸ یې ښځې دي.


د بخښنې نړیوال سازمان دا نه‌دي لیکلي چې دا کسان په کوم جرم نیول شوي، خو طالبانو تر ډېره معترضې ښځې او یو شمېر نور هغه فعالان نیولي چې د بشري حقونو پر ضد او د نجونو د زده‌کړو خلاف یې د طالبانو پرېکړې ننګولې وې او یا یې هم د طالبانو په سیاستونو نیوکه کوله.




د بخښنې نړیوال سازمان دا هم لیکلي چې طالبانو ۱،۱میلیون نجونې له ثانوي زده‌کړو او له سل زره ډېرې نجونې او ښځې پوهنتونونو ته له تلو منع کړي دي.


تر خوا یې د ۲۰۲۲ کال په څلورمه ربعه کې د ښځو د ګمارنې کچه د ۲۰۲۱ کال د دویمې ربعې په پرتله ۲۵ سلنه کمه شوې.


د بخښنې نړیوال سازمان داسې مهال دا ارقام خپروي چې طالبانو له محدودو دولتي ادارو پرته په ټولو دولتي او غیر دولتي ادارو د ښځو د کار مخه نیولې.


که څه هم د ښځو او نجونو په زده کړو او کار د بندیز پرېکړه د طالبانو حکومت د افغانستان کورنۍ مسئله بللې، خو د طالبانو دا پرېکړه په نړیواله کچه په پراخه کچه غندل شوې ده.


د بخښنې نړیوال سازمان دا هم ویلي چې د طالبانو له واکمنۍ وروسته ۴۳ سلنه رسنۍ سقوط شوې او تر څنګ یې ۸۴ سلنه ښځینه او ۵۲ سلنه نارینه خبریالان بې دندو شول.




د بخښنې نړیوال سازمان د ملکیانو مرګ‌ژوبلې ته هم اشاره کړې او وايي، د ۲۰۲۱ له اګست د ۲۰۲۳ کال تر مې میاشتې ۱۰۹۵ ملکیان وژل شوي او ۲۶۹۷ نور ټپیان شوي دي.


یاد سازمان دا نه دي ویلي چې دا ولسي مرګ ژوبله د کومې وسله والې ډلې د بریدونو له امله رامنځته شوې خو پر افغانستان د طالبانو د دوهم ځل واکمنۍ له پیل وروسته که څه هم طالبانو په ټول افغانستان کې د سرتاسري امنیت د ټینګښت دعوه کړې، خو وخت ناوخت د داعش وسله والې ډلې په حملو کې ملکي مرګ ژوبله اوختې ده.


د بخښنې نړیوال سازمان زیاتوي، نه یوازې دا چې طالب چارواکو د افغانانو د حقونو په ځانګړي توګه د ښځو د حقونو د ساتنې په برخه کې خپلې ژمنې ماتې کړي، بلکې تاوتریخوالی یې پیل کړی او له بشري حقونو یې پراخه سرغړونې کړي.


د دې سازمان له قوله، طالبانو په سیستماتیک ډول د بشري حقونو ساتنې کلیدي بنسټونه ړنګ کړي، د بیان ازادي یې له‌منځه وړې او په زرګونه افغانان یې په خپلسري ډول نیولي، بندیان کړي، شکنجه کړي، ورک کړي او ان وژلي دي.


په راپور کې دا هم لیکل شوي چې اوسمهال په افغانستان کې خبریالان، د بشري حقونو ملاتړي، هنرمندان او مذهبي او قومي لږکي په خطر کې دي.


د طالبانو حکومت د دې راپور په غبرګون کې د ازادي راډیو پوښتنه ځواب نه‌کړه، خو وړاندې یې ویلي چې په افغانستان کې د ټولو افغانانو حقونه خوندي دي.




هاخوا یو شمېر افغان فعالانې هم د طالبانو ځپونکو اقداماتو ته اشاره کوي او وايي، د طالبانو کړنو افغانستان تیارو ته وړی دی.


یوه ښځینه خبریاله چې نه غواړي نوم یې راپور کې واخیستل شي ازادي راډیو ته وویل: "د طالبانو بیا واکمنېدو افغانستان شل کاله پخوا حال ته وړی. ولس وځپل شو. تېرو دوو کلونو چې طالبان واکمن شوي، له هرې خوا افغان ښځې ځپل کېږي او ورځ تر بلې دردول کېږي."


یوه بله مدني فعاله چې دا هم نه غواړي نوم یې په راپور کې واخستل شي وايي، طالبانو تر ټولو سخت اقدامات د ښځو او نجونو پر ضد کړي دي.


هغه زیاتوي: "په پرله‌پسې توګه چې هر مکتوب او امر راځي هغه د افغان ښځې په اړه وي. لومړی د مکتبونو او پوهنتونونو موضوع وه، بیا د موسساتو موضوع شوه او ښځې له کارونو منع شوې."




خو د طالبانو حکومت بیا د ښوونځیو او پوهنتونونو له تړل کېدو او د ښځو د کار بندیز په اړه په دوی د لګېدلو ټولو بندیزونو دفاع کړې.


په همدې حال کې د بښنې نړیوال سازمان بیا له طالبانو غواړي چې سمدستي له خپلو غچ اخیستونکو پرېکړو لاس واخلي او د مذهبي او قومي لږکیو، د بشري حقونو د مدافعینو، قاضیانو، وکیلانو، پخوانيو دولتي چارواکو، څارنوالانو، خبریالانو او نورو پر وړاندې بریدونه پای ته ورسوي.


تر خوا یې نجونو ته د زده‌کړو اجازه ورکړي او د بیان ازادۍ د تضمین په ګډون له خپلسرو نیونو لاس په سر شي.

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