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د کډوالۍ څپه؛ له افغانستان څخه د کادرونو او متخصصينو تېښته به جبران شي؟

په افغانستان کې د طالبانو په بیا ځلې واکمنۍ سره له دغه هېواده د کډوالۍ څپه پیل شوه، ډېری کسانو چې په تېر یو کال کې يې هېواد پرېښی دی، باسواده، متخصصین او د فني او مسلکي ادارو کارکونکي وو.


په دوی کې اکثرو خلکو د طالبانو له وېرې او یا هم د روښانه راتلونکي په هیله کډوالۍ ته مخه کړه.


د هرات په پوهنتون کې د ادبیاتو د پوهنځي د انساني علومو پخوانی رئیس احمد غني خسروي چي شل کاله د اکاډومیکو زده کړو په برخه کې تجربه لري، په هند کې یې د دوکتورا تر کچې زده کړې کړې دي او د ژبې او تاریخ په برخه کې شنونکی هم دی.


نوموړی چې په تېرو شلو کلونو کې یې ډېر شمېر ځوانان روزلي، اوس د جرمني د بارد برلین پوهنتون په بلنه یاد هېواد ته تللی دی او هلته خپله د استادۍ دنده مخته وړي.


نوموړی خپل د تګ لامل اکاډمیک چاپېریال ته د طالبانو ورتګ او د دوی د حکومت لخوا په تحصیلي چاپیريال کې د محدویت لګول یادوي.


نوموړی وايي: "طالبانو بايد په پوهنتونونو کې مداخله نه کوله، ریاستونه او معاونیتونه به یې د پوهتنون پخوانیوکسانو ته پرېښي وای، نه دا چې دې برخې ته دوی خپله راشي او خپل کسان وګماري، ښکاره ده، چې دا کار یې پوهنتونونو ته مسلکي ضربه ورکړه او د دې لامل شو چې ډېر شمېر استادان پوهنتونونه پرېږدي."




د ده په وینا په وروستي یوه کال کې د کډوالۍ څپې او د طالبانو بیا واکمنۍ د هېواد ملي سرمایې ته چې باسواده او متخصص وګړي دي، کلکه ضربه ورکړه.


ډېری کسانو چې په دې تېر یوه کال کې يې هېواد پرېښی دی، باسواده، متخصیصین او د فني او مسلکي ادارو کارکونکی و.


د پوهنتون له استادانو څخه نیولې تر ډاکتران، خبریالان، هنرمندان، د بشري حقونو فعالان او داسې نور د وطن پرېښودلو ته اړ شول.


په جمهوري نظام کې د جوزجان د والي ټولنیزه مرستیاله سیما ستانکزۍ چې پنځلس کاله خبریاله او په یاد ولایت کې د ښځو د حقونو فعاله هم پاتې شوې وه، په خبره یې یوازینۍ مېرمن وه، چې په لوړه دولتي رتبه یې په جوزجان کې کار پیل کړ، خو ډېره پاتې نه‌شوه او طالبانو یې هغه هیلې چې د جوزجان د ولایت خلکو ته خدمت او له حقونونه یې دفاع وه، ورنه واخیستې.


سیما چې واده کړی او څلور اولادونه لري، د طالبانو د ګواښونو له وېرې یې جرمني ته پناه وړې.




نوموړې وایي، په افغانستان کې یې د شلو کلونو هلې ځلې او خدمت په یو ځلې له منځه لاړل، اوس اړه ده، چې هر څه له صفر څخه بیا پیل کړي.


هغې ويلي: "موږ باید ټول عمر په افغانستان کې هر څه له صفر څخه پیل کړو، تر یوه ځایه چې ځان رسوو، بیا له یوه بدلون سره هر څه ګډ وډ شي."


تېر شل کاله د افغانستان خلکو ته یو طلایی فرصت و، ترڅو په ټولنه کې له ښوونځيو او کاري اسانتیاوو څخه ګټه واخلي، له ګڼو ستونزو سره بیا هم د ځوانانو په منځ کې پرمختګ ورځ تر بلې غوړېده.


خو اوس چې انساني سرمایې له افغانستان څخه وتلي، ایا د جبرانولو زمینه به یې یو ځل بیا یاد هېواد ته برابره شي؟


د هرات پوهنتون استاد او د افغانستان د رسنیو د مطالعاتو د مرکز رئیس فیصل کریمي چې اوس يې په امریکا کې پناه اخیستې، دې پوښتنې ته ځواب وایي.


نوموړی وايي: "زرګونه متخصصان او باتجربه خلک چې د افغانستان مغازه یادېدل له دې هېواد څخه لاړل، موږ ګورو چې دا نه جبران کېدونکي دي، په یوه راتلونکي قرن کې باید حد اقل میلیون او میلیارد دالره سرمایه ګذاري وکړو او اسانتیاوې برابرې کړو، ترڅو وشو کړی، چې ورته کسانو ته زده کړه ورکړو."


فیصل کریمي هم د نورو زرګونو کسانو په څېر خپله ټوله شتمني په افغانستان کې پرېښې، ترڅو په وینا یې حد اقل خپل اولادونه له جنګ جګړو څخه لرې چاپېریال کې لوی کړي.


د طالبانو د حکومت کړه وړه هغه څه چې همدا اوس په افغانستان کې روان دي، نجونو ته له شپږم ټولګي پورته ښوونځي ته د تګ اجازه نه‌شته، مېرمنې په اکثره ادارو کې کار ته نه پرېښودل کېږي، په تګ راتګ یې محدویت لګېدلی دی، هغه کسان چې پر دوی نقد کوي بندي کېږي.


د طلوع ټلوېزیون کارکونکې ثریا امیري چې د طالبانو له واکمنۍ څخه وړاندې په افغانستان کې وه او خپل کار ته یې دوام ورکاوه، وایي چې طالبان د دوی دفتر ته ورغلل او پر نشراتو یې محدویت ولګاوه.


ثریا وایي چې د افغانستان پرېښودل ورته سخت و، خو د خپلې ازادۍ د ساتلو له پاره یې باید پرېښی وای.




هغه چې اوس په کاناډا کې اوسیږي، وایي چې ژوند له صفر څخه پیلول یې په اوږو لوی بار دی.


نوموړې ويلي: "ما د یوې ځوانې په صفت هغه عادي ژوند چې په افغانستان کې مې د ځان له پاره جوړ کړی و، یو ‌ډول د غرور او ویاړ احساس مې پرې درلوده، خو د طالبانو راتګ په تېره د لومړۍ ورځې چلند یې چې کابل ته راغلل، په ما د یوې پروډیوسرې په حیث چې هر څه یې راته بدل کړل، ډېر بد تاثېر وکړ."


د کډوالو په چارو کې د ملګرو ملتو د عالي کمېشنرۍ د سازمان د تازه شمېرو له مخې افغانستان له ۷ ،۲ میلیونه رسمي او ثبت شویو کډوالو سره د سېمې په کچه تر ټولو لوی جمعیت او په نړۍ کې دریم لوی جمعیت دی.


د ۲۰۲۱کال له وروستیو څخه تر اوسه ۱۰۸ زره افغان پناه غوښتونکو خپل هېواد پرېښی دی او د نړۍ ۹۸ هېوادنو ته کډه شوي دي.


خو افغانستان خپل ډېر قوي کاري ځواک له لاسه ورکړ او د هغو کسانو په باور، چې په دې راپور کې ورسره مرکې شوې دي، یو ځل بیا کلونه کلونه په شا ولاړ ، هغه ضربه چې ښايي په لسګونه نورو کلونو کې هم جبران نه شي.

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